46वीं बार रक्तदान कर प्रितम गाडिया ने दिया मानवता का संदेश

वर्ष 2002 से लगातार कर रहे रक्तदान, नए रक्तदाताओं को भी करते हैं प्रेरित

गोड्डा। जरूरतमंद मरीजों की जिंदगी बचाने के उद्देश्य से रक्तदान करने की अपनी परंपरा को जारी रखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता एवं चेंबर अध्यक्ष प्रितम गाडिया ने 46वीं बार रक्तदान किया। इस वर्ष यह उनका दूसरा रक्तदान है। लंबे समय से नियमित रूप से रक्तदान करते आ रहे प्रितम गाडिया ने कहा कि रक्तदान केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

प्रितम गाडिया ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2002 से लगातार रक्तदान करना शुरू किया और तब से अब तक नियमित रूप से रक्तदान करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास केवल स्वयं रक्तदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपने परिचितों, युवाओं और नए रक्तदाताओं को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करते रहे हैं, ताकि जरूरत के समय किसी मरीज को रक्त की कमी के कारण परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

उन्होंने कहा कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है और इसे किसी मशीन में तैयार नहीं किया जा सकता। जब किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होती है, तब किसी स्वस्थ व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान ही उसके लिए जीवनदायी साबित हो सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने नियमित रक्तदान को अपने सामाजिक दायित्व का हिस्सा बनाया है।

ब्लड बैंक की सुविधा नहीं थी, तब भी करते थे मदद

प्रितम गाडिया ने अपने रक्तदान के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने भागलपुर, पटना सहित कई शहरों के अस्पतालों में रक्तदान किया है। गोड्डा में जब ब्लड बैंक की सुविधा उपलब्ध नहीं हुआ करती थी, उस समय भी आपात स्थिति में डॉक्टरों और मरीज के परिजनों के आग्रह पर वे रक्तदान के लिए आगे आते थे।

उन्होंने कहा कि कई बार अस्पताल में किसी मरीज को तत्काल रक्त की आवश्यकता होती थी और परिजन रक्त की व्यवस्था को लेकर परेशान रहते थे। ऐसी परिस्थितियों में यदि उनका रक्त समूह जरूरत के अनुरूप होता था, तो वे बिना देर किए रक्तदान करने पहुंचते थे। उनके अनुसार, जरूरतमंद मरीज के परिवार के चेहरे पर राहत और संतोष देखना ही रक्तदान की सबसे बड़ी प्रेरणा है।

नए रक्तदाताओं को आगे आने की अपील

प्रितम गाडिया ने युवाओं और स्वस्थ लोगों से अपील करते हुए कहा कि समाज में रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पहली बार रक्तदान करने वाले व्यक्ति को शुरुआत में थोड़ी झिझक हो सकती है, लेकिन एक बार रक्तदान करने के बाद जब यह एहसास होता है कि आपके रक्त से किसी जरूरतमंद की मदद हो सकती है, तो स्वयं रक्तदान करने के साथ दूसरों को भी प्रेरित करने की इच्छा होती है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को रक्तदान से पहले चिकित्सकीय जांच और विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। पात्र एवं स्वस्थ वयस्कों के लिए रक्तदान निर्धारित अंतराल पर किया जाता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने स्वास्थ्य और चिकित्सकीय पात्रता के अनुसार नियमित रक्तदान करें।

46 बार रक्तदान का सफर

वर्ष 2002 से शुरू हुआ प्रितम गाडिया का रक्तदान का सफर अब 46वें रक्तदान तक पहुंच चुका है। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर जरूरत के समय रक्तदान कर लोगों की मदद की है। उनका कहना है कि रक्तदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है, जितना स्वयं रक्तदान करना।

उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो रक्तदान को लेकर आगे आएं और दूसरों को भी प्रेरित करें। यदि प्रत्येक स्वस्थ और पात्र व्यक्ति समय-समय पर रक्तदान करने का संकल्प ले, तो आपात स्थिति में रक्त की कमी से होने वाली परेशानियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

प्रितम गाडिया ने कहा कि रक्तदान किसी जाति, धर्म, वर्ग या क्षेत्र की सीमा में बंधा हुआ कार्य नहीं है। रक्त की जरूरत पड़ने पर मरीज की पहचान नहीं, बल्कि उसकी जिंदगी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए रक्तदान को मानवता की सेवा के रूप में देखते हुए अधिक से अधिक लोगों को इससे जुड़ना चाहिए।

उन्होंने अपने 46वें रक्तदान के अवसर पर लोगों से आह्वान किया कि जो लोग चिकित्सकीय रूप से रक्तदान के लिए पात्र हैं, वे आगे आएं, स्वयं रक्तदान करें और कम से कम एक अन्य व्यक्ति को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करें। उनका कहना है कि एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है और समय पर मिला रक्त किसी परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकता है।